प्रमोद भगत पैरालिंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले शटलरन गए। भगत को डेनियल बेथेल से हारने के बाद अपनी रणनीति में संशोधन करना पड़ा था। पीटीआई के मुताबिक, भगत ने कहा, “मैंने दो साल पहले जापान में उन्हीं प्रतिद्वंद्वी के साथ खेला था, और मैं हार गया था। वह मेरे लिए सीखने का मौका था। आज वही स्टेडियम और वही माहौल था, और मैंने जीतने की रणनीति तैयार की। मैं बहुत दृढ़ निश्चय था।” इस जीत से भारतीय पैरालिंपियन ने नवंबर 2019 में जापान पैरा-बैडमिंटन अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में उनसे हारने के बाद बेथेल से अपनी हार का बदला लिया।

स्वर्ण पदक जीतना उनके और देश के लिए क्या मायने रखता है, इस पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत गर्व का पल है। मैं भारतीय बैडमिंटन और भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। यह पहली बार है कि पैरा- बैडमिंटन पैरालिंपिक में भाग ले रहा है और भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए यादगार पल है।”

Pramod Bhagat

पहले भगत ने शनिवार को टोक्यो पैरालिंपिक के पुरुष एकल SL3 सेमीफाइनल में जापान के डाइसुके फुजीहारा को 21-11, 21-16 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। बता दें कि प्रमोद को फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाड़ी डैनियल बेथेल से खूब टक्कर मिली। पहला गेम प्रमोद ने आसानी से जीत लिया था। लेकिन दूसरे गेम में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। शुरुआत में ही डैनियल बेथेल ने बढ़िया खेल दिखाते हुए 11-4 की बढ़त हासिल कर ली।

आपको बताते चलें कि डैनियल गेम में लगातार दबदबा बनाए जा रहे थे और भारतीय खिलाड़ी के पास कोई जवाब नहीं दिख रहा था। लेकिन इंटरवल के बाद प्रमोद भगत ने शानदार वापसी करते हुए पहले स्कोर को 15-15 से बराबर किया। और इसके बाद दूसरा गेम 21-17 के अंतर से अपने नाम किया।

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