नासा ने आईपीसीसी (इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कई शहरों के समुद्र में डूब जाने की चेतावनी दोहराई है। IPCC की रिपोर्ट बीते नौ अगस्त को जारी की गई, जो जलवायु प्रणाली और जलवायु परिवर्तन की स्थितियों को बेहतर तरीके से परिभाषित करती है। IPCC हर 5 से 7 साल में दुनिया में पर्यावरण की स्थिति की रिपोर्ट देता है, इस बार यानी 2021 की रिपोर्ट बहुत भयावह है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक सी लेवल प्रोजेक्शन टूल बनाया है, जिससे समय रहते समुद्री तटों पर आने वाली आपदा से लोग अपनी हिफाजत कर सके।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2100 तक दुनिया का तापमान काफी बढ़ जाएगा। भविष्य में लोगों को प्रचंड गर्मी का सामना करना पड़ेगा, कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण नहीं रोका गया तो तापमान में औसत 4.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। अगले दो दशक में तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा, जब इस तेजी से पारा चढ़ेगा तो ग्लेशियर भी पिघलेंगे, जिसका पानी मैदानी और समुद्री इलाकों में तबाही लेकर आएगा।

नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा कि सी लेवल प्रोजेक्शन टूल दुनियाभर के नेताओं, वैज्ञानिकों को यह बताने के लिए काफी है कि अगली सदी तक हमारे कई देश जमीनी क्षेत्रफल में कम हो जाएंगे, क्योंकि समुद्री जलस्तर इतनी तेज बढ़ेगा कि उसे संभालना मुश्किल होगा। कई द्वीप डूब चुके हैं।

रिपोर्ट के अनुसार करीब 80 साल बाद, साल 2100 तक भारत के 12 तटीय शहर समुद्री जलस्तर बढ़ने से करीब 3 फीट पानी में चले जाएंगे। जिनमे भारत के ओखा, मोरमुगाओ, कांडला, भावनगर, मुंबई, मैंगलोर, चेन्नई, तूतीकोरन और कोच्चि, पारादीप का तटीय इलाका छोटा हो जाएगा। ऐसे में भविष्य में तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा, पश्चिम बंगाल का किडरोपोर इलाका तक समुद्री जलस्तर के बढ़ने का कोई खतरा बढ़ जाएगा।

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