जाति आधारित जनगणना की मांग हर तरफ हो रही है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने सोमवार को जाति आधारित जनगणना का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “जातिगत जनगणना शुरू की जानी चाहिए। मोदी जी के पास संसदीय शक्ति है, उन्हें कानून बनाना चाहिए।”

मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा “जाति आधारित जनगणना लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी, खासकर पिछड़ी जातियों के लोगों के लिए और बेहतर क्यूंकि हर राजनीतिक दल जाति आधारित जनगणना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) सहित जातियों का उप-वर्गीकरण महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसके लिए कानून बनाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर डाल दी।

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar Chief Minister Nitish Kumar) के नेतृत्व में 10 दलों के प्रतिनिधिमंडल के बीच जाति आधारित जनगणना पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में एक बैठक हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री से मुलाकात की है।

वहीं इस मुलाकात में शामिल रहे राजद नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने भी कहा कि जातिगत जनगणना तो होकर ही रहेगा। अगर जानवरों और पेड़ पौधों की गिनती हो सकती है तो इंसान की गिनती क्यों नहीं हो सकती है। जब धर्म के आधार पर लोगों की गिनती हो रही है तो जातिगत आधार पर भी लोगों की गिनती होनी चाहिए।

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