14/September/2021, 22:01

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदी दिवस के मौके पर सभी देशवासियों को ट्वीट के माध्यम से हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। उनकी यह शुभकामनाएं देने से पश्चिम बंगाल में जो उनके समर्थक हैं, वह उनसे नाराज होते नजर आ रहे हैं।

हिंदी दिवस के मौके पर मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक ट्वीट किया। वह ट्वीट उन्होंने हिंदी भाषा में लिखा और उस के माध्यम से भाषा को समृद्ध बनाने की दिशा में जो लोग काम कर रहे हैं, उनको शुभकामनाएं दी।

आज हिंदी दिवस के मौके पर ममता बनर्जी की शुभकामनाएं भवानीपुर में जो उपचुनाव होंगे उससे 1 दिन पहले आई है। इसमें टीएमसी के जो प्रमुख सीएम है, उनकी कुर्सी को बरकरार रखने के लिए फिर से चुनाव की मांग हो रही है।

भवानीपुर दक्षिण कोलकाता के बहुत पुराने इलाकों में से एक है। यहां पर सिर्फ बंगाली ही वोट नहीं डालते बल्कि यहां पर अलग-अलग तरह के लोग वोट डालते हैं। जैसे बंगाली के अलावा मारवाड़ी, गुजराती एवं पंजाबी भाषी मतदाता इसमें शामिल है।

बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अभिनेता रुद्रनिल घोष को इस में खड़ा किया था वहीं अब पार्टी ने उपचुनाव के लिए मारवाड़ी समाज से ही प्रियंका टिबरेवाल को खड़ा किया है।

हिंदी दिवस के मौके पर ममता बनर्जी के ट्वीट करके देशवासियों को शुभकामनाएं देना यह उनके खुद के ऊपर ही भारी बनता नजर आ रहा है, बंगाल के उनके समर्थकों ने उनकी तीखी आलोचना की है।

मैडम, मैं आपको अपने परिवार का सदस्य मानता हूं। हिन्दी के प्रति आपका उत्साह हमारे लिए दुखदायी है। अगर हिंदी भाषियों के लिए खानपान आपको वोट हासिल करने में मदद कर सकता है तो आपको हमारे करदाताओं के पैसे का उपयोग करके हिंदी विश्वविद्यालय बनाने के बावजूद 2019 के परिणाम का सामना करना पड़ेगा! ” एक ट्विटर उपयोगकर्ता शशांको ने लिखा।

“आप उन्हें कितना भी मक्खन लगा लें, वे हमेशा आपके खिलाफ रहेंगे। आपने जिस भी भाषा में ट्वीट किया है, इस ट्वीट से हकीकत नहीं बदलेगी। अगली बार फिर से सोचें जब आप “बांग्ला निजेर में के चाय” कहकर वोट मांगें। अगर आप हमारे वोट चाहते हैं तो बीजेपी की तरह व्यवहार करना बंद करें, ”एआईटीसी सपोर्टर नाम के एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा। “माँ, हम पर हिंदी मत थोपिए!” गौतम मजूमदार ने लिखा।

तन्वी नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘आप बंगाल के सीएम हैं। आपने जिस भाषा में ट्वीट किया है, वह बंगाल के 86 फीसदी लोग नहीं समझते हैं। क्या बांग्ला दिवस हिंदी पट्टी में मनाया जाता है? कितने हिंदी भाषी 21 फरवरी को मनाते हैं? हिंदी थोपना बंद करो”। उनकी यह शुभकामनाएं सिर्फ बंगाल के उनके समर्थकों पर ही नहीं, बल्कि विपक्ष ने भी ममता को उनके इस ट्वीट को लेकर उन्हें आड़े हाथों लिया है। सीपीआईएम नेता दीपसीता धर ने लिखा कि, “मुझे हिंदी दिवस क्यों मनाना चाहिए? क्या कोई बांग्ला दिवस है? तमिल दिवस? मलयालम दिवस? हिंदी एक खूबसूरत भाषा है, जब चाहा हिंदी बोल लेता हूं, लेकिन हिंदी की सर्वोच्चता के आगे झुक नहीं सकता। अभी नहीं, कभी नहीं।”

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