जी हां हम बात कर रहे है वीआईपी कल्चर की।क्या जनता और नेताओं के लिए नियम अलग अलग है?

ये नज़ारा है स्वर्गीय श्री रोहित सरदाना जी के अंतिम संस्कार का जिसमे कई दिग्गज नेता और मंत्री शामिल हुए।

अब सवाल ये उठता है जब स्वास्थ मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी कर खुद आदेश दिया हैं कि अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोग शामिल हो सकेंगे।

तो क्या ये आदेश सिर्फ आम जन के लिए है , नेताओं के लिए नही ?

जानकारी के लिए आपको बता दें कि रोहित सरदाना जी के अंतिम संस्कार में हरियाणा के गृहमंत्री समेत बीजेपी सांसद नायब सैनी और अन्य कई प्रमुख नेता और मंत्री शामिल हुए ।

ये वही हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज है जिन्होंने अभी कुछ दिनों पहले नई गाइडलाइन जारी करते हुए ये बताया था कि अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति है लेकिन जनाब शायद खुद ही गाइडलाइन पढ़ना भूल गए और भारी भीड़ और अपने अन्य नेताओ के साथ पहुच गए अंतिम संस्कार में ।

सवाल वही की क्या आदेश और नियम सिर्फ आम जनता के लिए है क्या नेताओं और मंत्रियों पर इन आदेशो का कोई फर्क नही पड़ता है ?

क्या समाज मे ये वीआईपी कल्चर कभी खत्म नही हो पायेगा । क्या गृहमंत्री जो खुद कोरोना पोजीटिव हो चुके है इस बात पर सफ़ाई देंगे ?

या ये सब बस यूहीं चलता रहेगा और जनता सिर्फ मूक बनकर देखती रहेगी

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