22/September/2021, IST 22:11 PM

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17 सितंबर को ब्रिटेन ने अपना नया यात्रा नियम लागू किया था। जिसमें बताया गया था कि भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड जिन व्यक्तियों को लगी है, उन्हें ब्रिटेन में मान्यता नहीं मिलेगी उनको 10 दिनों के लिए क्वॉरेंटाइन रहना होगा। जिसके बाद भारत सरकार ने ब्रिटेन के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी, और कहा था कि यदि जल्द से जल्द यूके ने इसका कोई परिणाम नहीं निकाला तो भारत इसके खिलाफ जवाबी कार्यवाही करेगा।

जिसके बाद यूके को अब अपना फैसला बदलना पड़ा है भारतीय सरकार का लगातार दबाव पड़ने की वजह से यूके ने कोविशील्ड को भी मान्यता दे दी है। जिसके बाद अब जिन लोगों को भी कोविशील्ड लगी हैं, वह सभी यूके की यात्रा कर सकते हैं। लेकिन यूके में अभी भी 10 दिनों तक क्वॉरेंटाइन रहने की आवश्यकता होगी। भारत सरकार ने यूके पर लगातार दबाव बनाया और कहा कि यूके ने यह सही नहीं किया है, यह भारत के साथ पक्षपात किया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने भी यूके के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी और इस फैसले को गलत बताया था।

अब ब्रिटेन में कोविशील्ड भी उन सभी वैक्सीन में शामिल हो चुकी है, जिसमें यूके के द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य वैक्सीन है। यह नए नियमों की शुरुआत यूके में 4 अक्टूबर से हो रही है। इस बात का यात्रियों को ध्यान रखने की आवश्यकता है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक लगने के अगले 14 दिनों के बाद ही यूके में यात्रा करने की अनुमति होगी, एवं वैक्सीन सर्टिफिकेशन होना भी अनिवार्य होगा।

ब्रिटेन ने जब यात्रा संबंधी अपनी नई नीति जारी की तो उसमें कोविशील्ड लगे होने वाले व्यक्तियों को यात्रा की अनुमति नहीं दी गई। इस संबंध में भारत की परेशानी को खत्म नहीं किए जाने पर विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने मंगलवार को यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में “उसी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन ने यह है भारत के खिलाफ बेहद भेदभाव पूर्ण नीति अपनाई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कोविशील्ड टीका जिन्होंने लगवाया है, उसके बारे में ब्रिटेन की नियुक्ति विदेश मंत्री एलिजाबेथ ट्रस को जो बैठक न्यूयार्क में आयोजित की गई थी, उसमें उनको भी पूरी तरह से बताया। कारण यह था कि जो भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड लोग लगवा रहे हैं, उन सभी को यूके में मान्यता नहीं दी गई।

यह वैक्सीन सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित की गई थी। और यह ब्रिटेन की एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन का ही भारतीय वर्जन है। फिर भी इसको ब्रिटेन ने मान्यता नहीं दी थी। लेकिन सरकार के दबाव के बाद अब इस को मान्यता मिल चुकी है। इस बारे में विदेश मंत्री सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी मंगलवार को कहा था कि, “यहां मुख्य मुद्दा यह है कि, एक टीका है कोविशील्ड, जो ब्रिटिश कंपनी का लाइसेंसी उत्पाद है, जिसका उत्पादन भारत में होता है और ब्रिटिश सरकार के अनुरोध पर हमने ब्रिटेन को इसकी 50 लाख खुराक भेजी है।”

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