21/September/2021, IST 22:15 PM

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ब्रिटेन ने भारतीय टीकाकरण कोविशील्ड को अपने देश में मान्यता नहीं दी है। यह फैसला 17 सितंबर को ब्रिटेन ने उस समय लिया जब उसने अपना नया ट्रैवल रूट बनाया, सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों को इस में मान्यता नहीं दी गई है। इसमें रूस, भारत, यूएई, थाईलैंड, दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका इन सभी को शामिल नहीं किया गया है।

ब्रिटेन के इस फैसले पर भारत देश ने आपत्ति की है। इसमें ऐसा है कि, जो व्यक्ति कोविशील्ड लगवा चुका है, उसको ब्रिटेन में जाकर पहले 10 दिनों तक क्वॉरेंटाइन रहना होगा। उसके बाद ही वह बाहर निकल सकता है। ब्रिटेन के इस फैसले पर भारत के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ ने भी आपत्ति की है।

इस बारे में भारत सरकार ने कहा है कि, ब्रिटेन ने भारत की वैक्सीन कोविशील्ड को मान्यता नहीं दी है। और इसीलिए ब्रिटेन ने भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया है। भारत की सरकार ने यह भी कहा है कि, यदि ब्रिटेन इसका कोई हल नहीं निकलता है तो, इसके खिलाफ भारत जवाबी कार्यवाही करेगा।

इस बारे में भारत के विदेश मंत्री हर्षवर्धन ने भी अपना बयान जारी करके कहा है कि, यूके सरकार ने भारतीय टीकाकरण कोविशील्ड को मान्यता नहीं दी है। और यह निर्णय “भेदभावपूर्ण” है। वह आगे कहते हैं कि यह भारत देश के “पारस्परिक उपाय करने के अधिकार” के अंतर्गतआता है। उन्होंने कहा कि, ‘कोविशील्ड की गैर-मान्यता एक भेदभावपूर्ण नीति है, और यूके की यात्रा करने वाले हमारे नागरिकों को प्रभावित करती है। विदेश मंत्री ने ब्रिटेन के नए विदेश सचिव के समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाया है। मुझे बताया गया है कि कुछ आश्वासन दिए गए हैं कि इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा।’

ब्रिटेन कर रहा है भेदभाव

भारतीय लोगों का कहना है कि ब्रिटेन भारत के साथ भेदभाव कर रहा है ब्रिटेन सरकार ने भारत के ऊपर कई नियम ठोक दिए हैं, जिससे भारत को भेदभाव का एहसास हो रहा है। ब्रिटेन के मुताबिक जिसने भी कोविशील्ड वैक्सीन ली है, उसको टीका लगा हुआ नहीं माना जाएगा। भारत में दो तरह की वैक्सीन को मान्यता दी गई है। कोविशील्ड एवं दूसरी को-वैक्सीन।

इसमें से सबसे ज्यादा लोगों ने भारत में कोविशील्ड लगवाई है। कोविशील्ड सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई है। यह वैक्सीन ब्रिटेन के एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का ही भारतीय वर्जन है। फिर भी इसको ब्रिटेन ने मान्यता नहीं दी है। इस बारे में ब्रिटेन की नेशनल इंडियन स्टूडेंट एंड एलुमनाई यूनियन की अध्यक्ष सनम अरोड़ा ने भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि, ‘भारतीय छात्र इस बात से परेशान हैं कि उन्हें लगता है कि यह एक भेदभावपूर्ण कदम है क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय संघ के उनके समकक्षों की तुलना में उनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है।’

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