20/September/2021, IST 20:37 PM

Image Source- Patrika

देश में सभी विपक्षी पार्टियां आज इकट्ठा होकर एक साथ मिलकर केंद्र की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आज से शुरू कर चुकी है। दरअसल, ये विरोध प्रदर्शन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि विपक्षी पार्टियों ने एक मीटिंग आयोजित की, जिसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के सामने 11 शर्तें रखी थी। इन्हीं शर्तों को पूरा करवाने की वजह से विपक्षी दल यह विरोध प्रदर्शन पर उतर आया है।

यह विरोध प्रदर्शन 11 दिनों तक चलाया जाएगा। यानी 30 सितंबर तक जारी रहेगा। जिस मीटिंग में यह फैसला लिया गया था वह 20 अगस्त को सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई थी। इसमें सभी विपक्षी दल शामिल थे। इस मीटिंग में यह भी तय हुआ था कि यदि आने वाले 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की हार करानी है, तो सभी अन्य विपक्षी पार्टियों को एक साथ मिलकर काम करना होगा।

बैठक खत्म होने के बाद इस बात का ऐलान भी किया गया कि 20 सितंबर से 30 सितंबर तक 19 विपक्षी पार्टियां मिलकर एक साथ केंद्र की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगी। सभी विपक्षी पार्टियों ने यह मांग की थी कि तीनों किसी कानूनों को वापस लिया जाए, जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिया जाए, महंगाई को कम किया जाए, एवं जो परिवार आयकर नहीं देते उन सभी को 7500 रुपए हर महीने दिए जाएं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि सभी जिनको जरूरत है, उनको मुफ्त में अनाज दिया जाए और जो भी जनता की जरूरत है, उनको पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि, ”पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस, खाने में उपयोग होने वाले तेल और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कमी की जाए। तीनों किसान विरोधी कानूनों को निरस्त किया जाए और एमएसपी की गारंटी दी जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का निजीकरण बंद हो, श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए और कामकाजी तबके के अधिकारों को बहाल किया जाए।”

विपक्ष ने सभी राजनीतिक कैदियों को भी रिहा करने की अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा कि, ”एमएसएमई क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज दिया जाए, खाली सरकारी पदों को भरा जाए। मनरेगा के तहत कार्य की 200 दिन की गारंटी दी जाए और मजदूरी को दोगुना किया जाए। इसी तर्ज पर शहरी क्षेत्र के लिए कानून बने। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों और छात्रों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण हो।”

उन्होंने आगे कहा कि, ‘हम केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी के उस रवैये की निंदा करते हैं कि जिस तरह उसने मॉनसून सत्र में व्यवधान डाला, पेगासस सैन्य स्पाईवेयर के गैरकानूनी उपयोग पर चर्चा कराने या जवाब देने से इनकार किया, कृषि विरोधी तीनों कानूनों निरस्त करने की मांग, कोविड महामारी के कु्प्रबंधन, महंगाई और बेरोजगारी पर चर्चा नहीं कराई।”

सभी विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए यह भी कहा है कि कोरोना के फैलने की वजह से यहां लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी है। इसके अलावा कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी भारत में छुपाया गया है। यहां कोरोना से लोगों की मौतें कितनी हुई है, यह नहीं बताया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में साफ साफ दर्शाया गया है कि, यहां कोरोना से बहुत ज्यादा मात्रा में मौतें हुई हैं।

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