16/September/2021, 20:58

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नैनीताल उत्तराखंड राज्य सरकार ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में चार धामों की यात्रा पर लगी रोक को हटाने के लिए एक प्रार्थना पत्र भेजा था। जिस पर गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ,आर एस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने पहले पूरे मामले को अच्छे से सुना एवं उस पर गौर किया जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि सभी कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए चार धाम की यात्रा की जा सकती है।

कोर्ट ने 28 जून को कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देख कर चार धाम की यात्रा पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद आज यह हटाई गई है। कोर्ट के द्वारा यह फैसला लेने से राज्य सरकार ने सुकून भरी सांस ली है। कोर्ट के इस फैसले से बहुत सारे लोगों का रोजगार वापस आने लगेगा। जैसे व्यवसायियों, तीर्थ पुरोहितों, एवं उत्तरकाशी, चमोली, और रुद्रप्रयाग इन सभी जिले के लोगों को अपना रोजगार ढूंढने के लिए मदद मिल सकेगी।

इस पर सुनवाई गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर एस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की बेंच द्वारा हुई थी। महाधिवक्ता बाबुलकर, मुख्य स्थाई अधिवक्ता सीएम रावत ने सरकार की तरफ से बोला कि वहां जो लोग रहते हैं, उनकी आजीविका, कोरोना के नियंत्रण में रहने, स्वास्थ्य की सेवाओं में सुधार, एसओपी का कड़ाई से पालन इत्यादि के आधार पर चार धाम यात्रा पर से रोक हटाई जाए। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट के बारे में भी बोला। महाधिवक्ता ने कहा कि चार धाम यात्रा के द्वारा वहां के लोगों का अर्निंग पीरियड चल रहा है।

यात्रियों की सीमित संख्या में ही हो सकेगी यात्रा

यात्रा के लिए सरकार ने रोज के हिसाब से यात्रियों की संख्या सीमित मात्रा में तय की है। कोर्ट ने सरकार के जो एसओपी है, उसको देखते हुए बद्रीनाथ में रोज आने वाले यात्रियों की संख्या 1200 से कम कर दी है। अब बद्रीनाथ में रोजाना 1000 यात्री ही सफर कर पाएंगे, इसी पर चलते हुए कोर्ट ने बाकी के तीन धामों केदारनाथ में रोजाना 100, एवं गंगोत्री में रोजाना 600, व यमुनोत्री में रोजाना 400 भक्तों, को यात्रा करने की छूट दी है। सभी यात्रियों के लिए कोर्ट ने सख्त नियम व कायदे कानून बनाए हैं। जैसे जो भी व्यक्ति यात्रा करने जा रहा है, उसके पास इस बात का सर्टिफिकेट मौजूद हो कि वह पूरी तरह से टीकाकरण करवा चुका है। और उसके पास इस बात की रिपोर्ट मौजूद हो कि वह कोरोना नेगेटिव है। जो हेलीकॉप्टर से यात्रा एवं यात्रा के रास्ते पर लोगों को सेवा प्रदान करते हैं, उन एनजीओ को जिलाधिकारी से अपना काम शुरू करने से पहले अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।

हाई कोर्ट द्वारा चार धाम की यात्रा पर 28 जून से लगी है रोक

देश में कोरोना का लगातार बढ़ना, और इसकी वजह से लोगों की जान जाने को देखते हुए हाईकोर्ट ने चार धाम की यात्रा पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर याचिका दाखिल की थी, और सरकार की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई नहीं हो पाई थी। इसके बाद, कुछ ही समय पहले महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व सीएससी चंद्रशेखर की बेंच ने चार धाम की यात्रा पर रोक हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी विचारधीन होने का हवाला दे दिया, और इस बात पर निर्णय लेने से मना कर दिया। जिसके तुरंत बाद सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस ले ली गई। सरकार ने फिर इस खबर के बारे में हाई कोर्ट को बताया जिसके बाद कोर्ट ने 15 व 16 सितंबर की तारीख को निश्चित किया।

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