7/September/2021, 22:10

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देश में एक और नया वायरस पाया गया है जिसका नाम निपाह है, निपाह वायरस का पहला मामला केरल राज्य में पाया गया है। केरल के कोझिकोड जिले के अंदर एक 12 साल के लड़के को इस वायरस से संक्रमित पाया गया था जिससे उसकी मौत हो चुकी है। पूरे देश में यह निपाह वायरस का पहला मामला है।

विशेषज्ञ इस बात का पता लगाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह वायरस कहां से एवं कैसे पनप रहा है, अब तक विशेषज्ञों द्वारा यह पता लगाया गया है कि,यह जानवरों के द्वारा इंसानों में संक्रमित हो रहा है। यह काफी तेजी से फैलने वाला वायरस है। इसमें मृत्यु दर बहुत ज्यादा बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मनुष्य में प्रवेश करने का तरीका यह है कि, यह चमगादड़ों की लार और मल- मूत्र के जरिए फलों या जानवरों से फैलता है यह। सबसे ज्यादा सूअर, कुत्ते, घोड़े, में पाया जाता है।

कैसे फैलता है संक्रमण?

निपाह वायरस फैलने का स्रोत है कि, यह वायरस संक्रमित चमगादड़ओं या फिर जो पक्षी पेड़ पर फलों को खा कर उन्हें झूठा कर देते हैं, उन फलों को मनुष्य द्वारा खा लेने से फैलता है एवं जो व्यक्ति इससे संक्रमित हैं उनके संपर्क में आने या जानवरों के संपर्क में आने से भी यह वायरस फैलता है।

निपाह वायरस के क्या है लक्षण?

कोरोना वायरस की तरह ही इसके भी लक्षण कुछ मिलते जुलते हैं यदि किसी को खांसी, बुखार, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ, श्वास संक्रमण, सिर दर्द , मांसपेशियों में दर्द, दिमागी बुखार, आंखों के सामने धुंधलापन, उल्टी, सुस्ती व इंसेफलाइटिस जैसी समस्या हो रही है तो यह खतरनाक है इसके लिए जल्द से जल्द चिकित्सक से संपर्क करने की आवश्यकता है। यह सभी लक्षण निपाह वायरस से संक्रमित मरीजों में पाए जाते हैं। इसके लक्षण 5 से 20 दिनों के अंदर पता चलने लग जाते हैं। यह ऐसा वायरस है कि 24 से 48 घंटों के बीच में मरीजों को कोमा में पहुंचा सकता है।

कैसे कराएं जांच?

निपाह वायरस की जांच किसी भी अस्पताल में की जा सकती है। इसके लिए चिकित्सक आरटी पीसीआर टेस्ट और एलिसा जांच कर रहे हैं।

कैसे रखें खुद को सुरक्षित?

जरूरी है कि अपने हाथों को बार बार साबुन से धोया जाए एवं कोई भी फल या सब्जी को अच्छे से धो कर इस्तेमाल किया जाना चाहिए और याद रखें कि कोई भी ऐसा फल या सब्जी ना इस्तेमाल करें जिस पर किसी जानवर या पक्षी के खाए जाने के निशान हो, खजूर का रस एवं ताड़ी को पीने से बचना होगा एवं किसी भी जानवर एवं पक्षी से बिल्कुल दूर रहें। मास्क लगातार पहनें एवं सभी से दूरी को बनाकर रखें।

इलाज

इसके लिए अभी कोई कारगर इलाज नहीं बन पाया है। हालांकि परीक्षण लगातार जारी है। इस वायरस से बचने के लिए अभी कोई टीका भी चिकित्सकों के पास नहीं है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ आशुतोष का कहना है कि, “फल चमगादड़ वायरस के वाहक हैं, और वे संचरण का मुख्य कारण हैं। फल चमगादड़ एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में रहते हैं। यदि वे अन्य स्थानों पर उड़ते हैं, तो स्वाभाविक रूप से इस वायरस को प्रेषित किया जा सकता है। हमारे पास इसके लिए विशिष्ट उपचार नहीं है। “तो, हमें यह समझना होगा कि यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी है और उच्च रुग्णता और मृत्यु दर से जुड़ी है,” उन्होंने कहा।

इसके अलावा डॉ विश्वास के अनुसार, “अतीत में, हमने भारत में देखा और देखा है, कि फल चमगादड़ इसे हमारे घरेलू जानवरों जैसे सूअर, बकरी, बिल्ली, घोड़े और अन्य में भी प्रसारित कर सकते हैं। इसलिए, जानवरों से मनुष्यों में इस वायरस का कूदना बहुत है खतरनाक है, और जिसे हम स्पिलओवर कहते हैं,”

इस वायरस के बारे में जानकारी देते हुए बिस्वास ने बताया कि “एक बार जब यह वायरस मानव परिसंचरण में आ जाता है, तो यह मानव-से-मानव में संचारित होना शुरू हो जाता है और संचरण इतना तेज़ होता है कि यह फैल सकता है। इसलिए, इसकी पहचान करना महत्वपूर्ण है। शुरुआत में स्रोत। जैसा कि संकेत दिया गया है, ज्यादातर समय, हमने पाया है कि संचरण फल चमगादड़ से होता है।” उन्होंने आगे कहा कि, गिरे हुए फलों को खाना, वह भी बिना धोए खाना, एक बहुत ही खतरनाक आदत है”।”इससे पहले हमारे पास दो निपाह वायरस का प्रकोप था; एक बार केरल में, एक बार पश्चिम बंगाल में। पिछले प्रकोप के दौरान, लगभग 90 प्रतिशत संक्रमित व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। फिर 2019 में, हमारे पास वायरस का सिर्फ 1 मामला था, और अब 2021 में, हमें एक और मामला मिला है, बहुत घातक। इसलिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसा क्यों हो रहा है,” बिस्वास ने कहा।

यह वायरस भारत के अलावा और भी कई दूसरे देशों में फैल रहा है जैसे बांग्लादेश, भारत एवं नेपाल अन्य।

जब देश के राज्य केरल से केंद्र सरकार को यह सूचना मिली कि निपाह वायरस के कारण वहां एक 11 साल के बच्चे की मौत हुई है तो तब केंद्र सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए केरल में कोझिकोड जिले के अंदर एक चिकित्सक दल को वहां के बारे में पता करने भेजा जिसके बाद इस टीम ने उस 11 साल के लड़के के घर की छानबीन की एवं संक्रमण का पता लगाने के लिए आसपास के रामबुटन फलों को इकट्ठा किया ताकि उनकी जांच की जा सके।

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