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तीन कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन को दिल्ली के जंतर-मंतर पर करने की मांग को पूरा करवाने के लिए किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसकी आज फिर सुनवाई हुई है। किसानों ने मांग की है कि, तीनों कृषि कानूनों को सरकार वापस ले, इसके विरोध प्रदर्शन के लिए उन्होंने जंतर-मंतर पर सुप्रीम कोर्ट में इजाजत मांगी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आप लोग तीन कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुके हैं, तो फिर विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? आप लोगों ने इस मामले को कोर्ट में लाकर इसका फैसला कोर्ट के ऊपर रखा है, और इसके द्वारा आपने अपने अधिकारों का भी उपयोग कर लिया है, तो आपको प्रदर्शन करने की इजाजत किसलिए मिलनी चाहिए।

जिसके बाद किसानों ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि जब 26 जनवरी की घटना हुई थी तो उस दौरान उन्होंने अपने आप को दिल्ली की सीमाओं पर जो किसान बैठे हुए हैं, उनसे अलग कर लिया था। अब वह उन किसानों के संगठनों में शामिल नहीं है।

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 21 अक्टूबर रखी है।

मामले पर बोलते हुए कोर्ट ने कहा कि आखिर आप किसके विरोध में प्रदर्शन करना चाहते हैं,। आप लोगों को पता है कि अभी इस समय कोई भी कानून नहीं है। कानूनों पर फिलहाल रोक लगाई हुई है, तो फिर विरोध प्रदर्शन क्यों?

कोर्ट में जज ने यह भी कहा कि जब यह मामला कोर्ट में आ चुका है तो, इसके विरोध में सड़कों पर नहीं उतरना चाहिए। उन्होंने कहा कि, ‘हमने तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा रखी है. कुछ भी लागू नहीं है. तो किसान किस बारे में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं? अदालत के अलावा और कोई भी कानूनों की वैधता तय नहीं कर सकता. जब किसान अदालत में कानूनों को चुनौती दे रहे हैं तो सड़क पर प्रदर्शन क्यों?’

सुप्रीम कोर्ट के जज खानविलकर ने कहा कि जब किसी की मौत हो जाती है, या प्रॉपर्टी को कोई नुकसान हो जाता है तो, कोई उसकी जिम्मेदारी लेने सामने नहीं आता है। उन्होंने कहा कि, ‘जब आंदोलन के दौरान कोई हिंसा होती है. सार्वजनिक संपत्ति नष्ट होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. जान और माल की हानि होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता.’

जज खानविलकर ने किसानों से पूछा कि, ‘एक ओर आप कोर्ट में याचिका दायर कर इंसाफ मांगने आए हैं और दूसरी ओर विरोध प्रदर्शन भी जारी है. राजस्थान हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर रखी है आपने. हम चाहते हैं कि दोनों याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई हो. क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट में इन कानूनों की वैधता को चुनौती दी गई है.’

कोर्ट ने सवाल किया, ‘जब मामला अदालत में है तो आप प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?’ जिसके बाद अपनी सफाई पेश करते हुए किसान महापंचायत के वकील ने कहा कि, हमारा प्रदर्शन कानूनों के खिलाफ ही नहीं है, बल्कि हम एमएसपी भी मांग रहे हैं.’ वकील की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि, ‘अगर याचिकाकर्ता की ओर से कानून को एक कोर्ट मे चुनौती दी गई है तो फिर क्या मामला अदालत में लंबित रहते हुए विरोध प्रदर्शन की इजाजत दी जा सकती है? प्रदर्शन की इजात मांगने का क्या औचित्य नहीं है?’ सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से कहा कि, अब आप एक रास्ता चुनें. कोर्ट का, संसद का या सड़क पर प्रदर्शन का.’

लखीमपुर खीरी में चल रहा विरोध प्रदर्शन की हुई चर्चा

किसानों की इस सुनवाई के दौरान लखीमपुर खीरी में विरोध प्रदर्शन की भी चर्चा हुई, अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि, कल लखीमपुर खीरी में हिंसा हुई. 8 लोगों की मौत हो गई. इस तरह विरोध नहीं हो सकता.’ जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ‘जब आंदोलन के दौरान कोई हिंसा होती है. सार्वजनिक संपत्ति नष्ट होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. जान और माल की हानि होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता.’ इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बोला कि, ‘जब मामला पहले से ही अदालत में है तो लोग सड़कों पर नहीं उतर सकते.’ कोर्ट ने आदेश दिया है कि, राजस्थान हाई कोर्ट में दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। और इसमें केंद्र सरकार को भी जल्द ही जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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