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लंबे समय से चल रहे भारत में किसानों के आंदोलन ने आज फिर तूल पकड़ी है। किसानों ने आज सुबह 6:00 बजे से शाम को 4:00 बजे तक आंदोलन को चलाया। इस दौरान देश में लगातार कई जगहों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। दिल्ली एनसीआर में भी लंबा जाम देखने को मिला।

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आज भारत बंद में किसानों को कई राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला। हालांकि, किसानों के इस प्रदर्शन में किसानों की संख्या ना के बराबर ही रही थी। इसमें कई राजनीतिक दलों के संगठन देखने को मिले। जब उनसे पूछा गया कि किसानों की संख्या कम क्यों हैं?, तो उन्होंने जवाब दिया कि, क्योंकि मीडिया ने किसानों को इस बारे में अवगत ही नहीं कराया जिसकी वजह से किसानों को आंदोलन का ठीक से पता नहीं चल पाया।

किसानों ने दावा किया है कि उनका आज का भारत बंद सफल रहा है। कई ऐसे इलाके भी पाए गए जिनमें लोगों की दुकानें जबरन बंद कराई गई। वही एक तरफ किसानों के नेता राकेश टिकैत का भी बयान आ चुका है। और उन्होंने कहा है कि किसानों का हमारा आज का भारत बंद सफल रहा है, और इसमें सभी किसानों ने पूरी तरह से समर्थन दिया है।

इस आंदोलन में कांग्रेस के कार्यकर्ता, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी, और किसान मजदूर यूनियन के कई नेता भी साथ देते हुए देखे गए।

देश में सभी तरफ पुलिस तैनात की गई थी। लेकिन देश के कई इलाके ऐसे भी रहे जिस में हालात सामान्य देखने को मिले। जैसे भोपाल में सभी स्थान खुले मिले वहां कुछ भी बंद नहीं था। इस बारे में किसानों के नेता राकेश टिकैत के भी कई बड़े बयान सामने आए हैं। उन्होंने किसानों को शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने कहा कि, “आज संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद पूरी तरह से सफल रहा. देशभर में किसानों ने सड़कों पर आकर अपने गुस्से का इजहार किया. हजारों जगह से भी ज्यादा किसान सड़कों पर बैठे. बंद को किसानों के साथ-साथ मजदूर व्यापारियों, कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन का भी सहयोग मिला. देश की राजनीतिक पार्टियों ने भी बंद का समर्थन किया.”

उन्होंने किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक किसानों के बंद का पूरा असर रहा. सुबह से लेकर शाम के 4 बजे तक कहीं भी कोई घटना या हिंसक झड़प नहीं हुई. इसके लिए देश के किसानों, मजदूरों और नागरिकों का भी आभार व्यक्त करते हैं.”

टिकैत ने कहा, ‘3 राज्यों का आंदोलन बताने वाले लोग आंख खोल कर देख लें कि पूरा देश किसानों के साथ खड़ा है. सरकार को किसानों की समस्या का समाधान करना चाहिए. उत्तर प्रदेश में जो गन्ना मूल्य की घोषणा की गई है वो भी किसानों के साथ मजाक है. गन्ना मूल्य वृद्धि के लिए भी जल्दी सड़कों पर आंदोलन किया जाएगा. भारत बंद के कार्यक्रम से कुछ लोगों को स्वाभाविक रूप से परेशानी हुई होगी लेकिन एक दिन किसानों के नाम सोच कर भूल जाएं.’

उन्होंने कहा, ‘किसान 10 महीने से घर छोड़कर सड़कों पर है. लेकिन अंधी और बहरी सरकार को न तो कुछ दिखाई देता है और न ही सुनाई देता है. लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. सरकार इस भुलावे में ना रहे किसान खाली हाथ घर लौट जाएंगे. किसान आज भी बिल वापसी तो घर वापसी की मांग पर पूरी तरह से अडिग है. हमारी सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाए.’

उन्होंने कहा, ‘हमारा भारत बंद सफल रहा. हमें किसानों का पूरा समर्थन मिला. हम सबकुछ सील नहीं कर सकते, क्योंकि हमें लोगों की आवाजाही भी बनाए रखनी है. हम सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई बातचीत नहीं हो रही है.’

डीसीपी के पैर पर किसान नेता की चढ़ी कार

इस आंदोलन के दौरान कई घटनाएं सामने आई। जिसमें से एक यह भी है कि, बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन के दौरान डीसीपी के पैर पर एक एसयूवी कार चढ़ गई। यह कार एक किसान नेता की थी। जब कार पैर पर चढ़ी तो जो वहां बाकी की पुलिस मौजूद थी उन्होंने डीसीपी के पैर को घसीटा जिससे उनको गंभीर चोट नहीं आई है।

दरअसल विरोध प्रदर्शन के दौरान डीसीपी के साथ और भी पुलिस तुमकुरू रोड पर मौजूद थी। यहां पुलिस को यह काम सौंपा गया था कि जो भी किसान शहर के अंदर प्रवेश करने की कोशिश करें, उसको वही रोका जाए और वापस भेज दिया जाए। लेकिन किसान नेता ने अपनी एसयूवी कार से अंदर घुसने की कोशिश की। की तभी डीसीपी ने उसको रोका परंतु वह कार को लेकर उनके पैर पर चढ़ गया। तुरंत ही डीसीपी को पट्टी की गई, और दवा दी गई। कुछ समय बाद ही डीसीपी ने अपनी ड्यूटी दोबारा ज्वाइन कर ली क्योंकि उनको गंभीर चोटें नहीं आई थी।

घटना होने के बाद पुलिस द्वारा इस कार को अपने कब्जे में लिया गया। और जो किसान नेता इस कार को चला रहा था, पुलिस ने उस को भी गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ चल रही है।

किसानों का यह आंदोलन पूरे भारत में हुआ। इसमें कई घटनाएं भी सामने आई है। यह आंदोलन कुल 10 घंटों के लिए हुआ था। इस आंदोलन ने कई जगह जाम लगवाया, गाड़ियों को लंबी-लंबी लाइनों में देखा गया। जगह-जगह पुलिस भी मौजूद थी, ताकि कोई बड़ा विवाद ना हो सके।

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