आपसी सहयोग 

आपसी सहयोग के अन्तर्गत वह व्यवहार आते हैं जो एक दूसरे के जीने में योगदान देते हैं।

आपसी सहयोग के पांच सिद्धान्त

  • बंधु चयनः यदि एक दूसरे की सहायता करने वाले आनुवंशिक रिश्ते से जुड़े हैं, तो सहयोग देने वाले को वास्तव में नुकसान नहीं होता, क्योंकि जिसकी भलाई हो रही है उसमें सहायता देने वाले की जीन हैं, जिन्हें लाभ होता है। जैसे दो भाई, माँ-बाप और बच्चे। हेमिल्टन के नियम के अनुसार “र*ल>ह” जिसमें ‘ल’ सहायता प्राप्त करने वाले को लाभ; ‘ह’ सहायता देने वाले को हानि; तथा, ‘र’ दोनों में आनुवंशिक रिश्ते का माप।
  • प्रत्यक्ष पारस्परिकताः इसमें वह सहयोगी व्यवहार आते हैं जिनमें दो सहयोगी एक दूसरे को सीधा लाभ पहुंचाते हैं। जैसे, पहले एक बंदर ने दूसरे बंदर के बल संवारे, फिर दूसरे बंदर ने पहले के बल संवारे। यह गैर-बंधु चयन है, अर्थात यह ज़रूरी नहीं कि एल दूसरे की सहायता पहुँचाने वाले आपस में सगे सम्बन्धी हों। यदि सहयोग के बदले सहयोग न मिले तो यह सम्बन्ध टूट जाएगा।
  • अप्रत्यक्ष पारस्परिकताः नौवाक का मानना है कि सहायता करने से व्यक्ति का यश बढ़ता है। अतः एक सदस्य अपने व्यवहार से या कुछ दान देकर, समूह के सदस्यों की मदद कर, अपना यश बढ़ाता है, जिसका उपयोग वह समूह में प्रभावशाली नेता बनने के लिए भी कर सकता है। इसमें सहायता करने वाले को सीधा लाभ नहीं होता, अपितु परोक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
  • तंत्र पारस्परिकताः एक समूह में कई तरह के सदस्य होते हैं, कुछ दूसरे की सहायता करते हैं, कुछ मुफ्त में लाभ उठाते हैं, तथा कुछ इसमें भाग नहीं लेते। कुछ सदस्य जो एक दूसरे की सहायता करते हैं, समूह के अन्दर एक अलग सामाजिक जाल या दल बनाते हैं, जिससे मुफ्त खोरों से बचाव होता है।
  • समूह चयनः जंतु छोटे-छोटे समूहों में रहते हैं। जिस समूह में सदस्य एक दूसरे की सहायता करेंगे, वह दूसरे समूह जिसमें सदस्य स्वार्थी हैं, से ज्यादा फैलेगा। इसमें पूरा समूह चयन की इकाई है, जो दूसरे समूह के साथ प्रतिस्पर्द्धा में फैलता है या विलुप्त होता है। विल्सन और विल्सन ने समूह चयन, जिसे अब बहुस्तरीय चयन कहते हैं, की समीक्षा की है।[4] उन्होंने लिखा कि, विन-एडवर्ड द्वारा प्रतिपादित[14] समूह चयन जंतुओं के पर्यावलोकन पर आधारित है, इसका प्रबल विरोध हुआ, किन्तु ४० वर्ष बाद यह सहयोगी व्यवहार के प्राकृतिक चयन की मुख्य इकाई बन गया।

आज समाज में श्रेष्ठ मानवों की जरूरत है। श्रेष्ठ विचार और ब्रह्मज्ञान से ही श्रेष्ठ मानव बन सकते हैं।

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आज हम अपने आदर्शों को भूल चुके हैं। इसलिए समाज के उत्थान के लिए आज फिर से ऐसे संत की जरूरत है जो सोए हुए मानवों को जगा कर उनके घट में ही ईश्वर का बोध करवा दें, तभी समाज में शांति की स्थापना हो सकती है।


बेहतर समाज के लिए सबको सोचना होगा, सिर्फ बातें नहीं, काम करना होगा

भारत में तेजी से आर्थिक और राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं। जब आर्थिक और राजनीतिक बदलाव होते हैं तो उसका सीधा असर समाज पर पड़ता है और ऐसे में सामाजिक संरचनाएं टूटती हैं। संरचनाओं के टूटने का असर लोगों की मानसिकता पर गहरा पड़ता है। तय है इससे हर उम्र और हर तबके के लोगों पर प्रभाव पड़ता है। लेकिन क्या जो सामाजिक बदलाव हो रहा, वो सही है? जिन हालात में हम रह रहे हैं क्या उससे हम संतुष्ट हैं? क्या समाज के हर तबके तक वो सारी चीज़े पहुंच रही हैं जिसकी उन्हें उम्मीद है? इन सारे सवालों से जूझना ज़रूरी है और गंभीरता से सोचना ज़रूरी है।

“समाज के बदलने से पहले खुद को बदलना ज़रूरी है, दुनिया को बदलने से पहले खुद को ठीक करना ज़रूरी है। यह बिलकुल ऐसा ही है कि हमें जब ट्रैफिक पुलिस वाला पकड़ता है और चालान करने करने लगता है तो हम सौ रुपए देकर अपनी जान छुड़ाते हैं। ऐसे में हम क्या करते हैं? चूंकि चालान पांच सौ रुपए का होता, इसलिए हमने चार सौ रुपए बचा लिए। ज़ाहिर है हम उस ट्रैफिक वाले से चार गुणा ज्यादा बड़े चोर हैं। ऐसे में हम किस समाज के बदलाव के बात करते हैं।”

“समाज में जिस बदलाव की सबसे ज्यादा ज़रूरत है वो है लोगों के मन में सुरक्षा का भाव आना। जिसकी शुरुआत घर से होती है। ऐसा क्यों नहीं होता कि हम अपने घरों में अपनी छोटी बेटी को अकेले रहने देते हैं। वजह है असुरक्षा। जिस दिन हम ऐसा करने लगेंगे उस दिन समझा जाएगा कि बदलाव आ रहा है समाज में। इसलिए समाज को तभी बदला जा सकता है जब हमारी मानसिकता बदलेगी।”

समाज को सही दिशा की और जागरूकता की जरूरत है 

सामाजिक समस्याएं 

भारत एक प्राचीन देश है और कुछ अनुमानों के अनुसार, भारतीय सभ्यता लगभग पाँच हज़ार साल की है। इसलिए, यह स्वाभाविक है कि इसका समाज भी बहुत पुराना और जटिल होगा। इसलिए, भारतीय समाज विविध संस्कृतियों, लोगों, विश्वासों और भाषाओं का एक जटिल मिश्रण है जो कि कहीं से भी आया हो, लेकिन अब इस विशाल देश का एक हिस्सा है।

यह जटिलता और समृद्धि भारतीय समाज को एक बहुत जीवंत और रंगीन सांस्कृतिक देश बनाता है। हमारे भारत देश में आज भी बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जो भारत के विकास में वाधा बनी हुई हैं। जैसे – गरीबी, जनसंख्या, प्रदूषण, निरक्षरता, भ्रष्टाचार, असमानता, लैंगिक भेदभाव, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी, क्षेत्रवाद, जातिवाद, शराब, नशाखोरी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा प्रमुख हैं।

आज हमारे समाज में जो सामाजिक बुराईयां व्याप्त हैं, उन्हें शायद ही कभी सूचीबद्ध किया जा सके। उनमें से प्रमुख हैं- किशोर अपराधी; बाल शोषण; धोखा; ड्रग पेडलिंग; मुद्रा तस्करी; घूसखोरी और भ्रष्टाचार; सार्वजनिक निधियों का गबन; छात्र और युवा अशांति; सांस्कृतिक हिंसा; धार्मिक असहिष्णुता; सीमा विवाद; बेईमानी; चुनाव में धांधली; कर्तव्य के प्रति कमिटमेंट न देना; परीक्षा में गड़बड़ी; अनुशासनहीनता; अन्य प्रजातियों के लिए अनादर; सकल आर्थिक असमानता; गरीबी; बीमारी और भूख; व्यापक अशिक्षा; रोजगार के अवसरों की कमी;  अन्याय; अधिकार का दुरुपयोग; आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी; जनता का शोषण; भेदभाव और जातीय भाषावाद; जानवरों के साथ दुर्व्यवहार मानव क्षमता की कमी; गृह युद्ध; सूखा;  मानव तस्करी और बाल श्रम आदि।  

1. गरीबी 

गरीबी एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक घर जीवित रहने के लिए भोजन, कपड़े और आश्रय आदि जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। भारत में गरीबी एक व्यापक स्थिति है। स्वतंत्रता के बाद से, गरीबी एक मुख्य चिंता बनी हुई है। यह इक्कीसवीं सदी है और गरीबी अभी भी देश में बनी हुई है।

2. निरक्षरता

निरक्षरता एक ऐसी स्थिति है जो राष्ट्र के विकास में बहुत बड़ी रुकाबट बनी हुई है। भारत की अधिकतर आबादी निरक्षर है। भारत सरकार ने हालांकि निरक्षरता के खतरे से निपटने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। भारत का विकास लोगों के साक्षर होने से ही हो पायेगा।

3. बाल विवाह

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बाल विवाह का दूसरा स्थान है। पहला कानून जो बनाया गया था वह 1929 का बाल विवाह निरोधक कानून था जो जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू किया गया था। बाल विवाह भारत में व्याप्त सामाजिक समस्याओं में से एक है जिसका अंत लोगों को जागरूक करके ही होगा।

4. भुखमरी 

भुखमरी एक ऐसी स्थिति है जिसका परिणाम कुपोषण है। जिसके बारे में ध्यान नहीं रखने पर अंत में मृत्यु हो जाती है। क्वाशीकोर और मार्समस बीमारी की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लोग ऐसे आहार ले रहे होते हैं जो पोषक तत्वों (प्रोटीन, विटामिन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, वसा और फाइबर) से भरपूर नहीं होते हैं। भारत के संदर्भ में, यह कहना अनावश्यक है कि खाद्य वितरण प्रणाली त्रुटिपूर्ण है। लेकिन अब इन समस्याओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

5. बाल श्रम 

बाल श्रम का मतलब आमतौर पर भुगतान के साथ या उसके बिना किसी भी काम में बच्चों का रोजगार है। बाल श्रम केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, यह एक वैश्विक घटना है। जहां तक ​​भारत का संबंध है, यह मुद्दा एक दुष्चक्र है क्योंकि भारत में बच्चे ऐतिहासिक रूप से अपने खेतों और अन्य प्राथमिक गतिविधियों में माता-पिता की मदद कर रहे हैं।

6. भ्रष्टाचार 

भ्रष्टाचार राष्ट्र की रीढ़ को बर्बाद कर रहा है, और इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ये भारत देश के लिए बहुत बड़ी समस्याओं में से एक है। सरकार को रिश्वत देने वाले और रिश्वत लेने वाले के खिलाफ समान रूप से कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।

7. आतंकवाद

भारत के विभाजन के दिन से आतंकवाद ने भारत को प्रभावित किया है। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर विवाद लंबे समय से अनसुलझा मुद्दा रहा है। इसका उपयोग करते हुए, पड़ोसी देश ने भारत के खिलाफ आतंक का सबसे अधिक इस्तेमाल किया है। जो ख़तम ही नहीं हो रहा।

8. सांप्रदायिकता 

विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का मिश्रण होने के कारण, भारत में सांप्रदायिक मतभेदों को बढ़ावा मिला है। सांप्रदायिक झड़पों के कारण देश भर में विभिन्न घटनाओं में बहुत हिंसा होती है। इस तरह की घटनाएं होने के कारण भारत आर्थिक और राजनीतिक रूप से प्रभावित होता है।

9. मुद्रास्फीति 

पिछले वर्षों में मुद्रास्फीति को आम आदमी द्वारा सामना करते हुए देखा गया है। वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने लोगों में रोष पैदा कर दिया है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती दरों ने मध्यम वर्ग की जेब को इतना प्रभावित किया है, जिससे लोगों को मुद्रास्फीति का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

10. महिलाओं का शोषण

भारत में महिलाएं हर समय एक निरंतर भय से युक्त रहती हैं। अकेले बाहर जाने का डर, भारत में रहने वाली हर महिला के मन को परेशान करता है। देश भर में यौन शोषण और बलात्कार के बढ़ते मामलों ने भारत की प्रतिष्ठा पर एक काला निशान छोड़ दिया है। ये एक ऐसी समस्या है जो अभी भी हल नहीं हो पा रही है।

इन समस्यायों को दूर करने के लिए कई संस्थाएं काम कर रही हे 

पर 

क्या वाकई ये संस्थाएं इन समस्यायों को दूर कर पा रही है 

जवाब ना ही होगा, जैसा की हम खुद भी देखते आ रहे की देश में २ लाख से अधिक संस्थाएं है जो इन सभी पर कार्य करती है इसके वाबजूद ये समस्याएं देश में बढ़ती जा रही है 

कारण 

हम सभी जानते है की देश में ज्यादातर संस्थाएं डोनेशन पर काम करती है और डोनेशन देने वालों का संस्थाओं पर पूरा दवाब रहता जिस कारण कोई भी संस्था प्रत्यक्ष रूप से काम नहीं कर पाती है, और जैसे ही किसी संस्था को डोनेशन मिलना बंद हो जाता है वैसे ही ज्यादातर संस्थाएं बंद हो जाती है 

इसके बाद वो संस्थाएं काम कर रही है जो राजनीतिक पार्टियों के फंड्स और दवाब में कार्य कर रही है जिनका जनता तक पूरा सहयोग कभी पहुंच ही नहीं पता है 

इसके साथ साथ ऐसी भी संस्थाएं है जो सिर्फ अपने आप को बढ़ाने के लिए बनाई जा रही है 

ऐसे में सवाल ये उठता है की क्या देश में इन समस्यायों का निवारण कभी नहीं हो पायेगा 

इसका जबाव आप खुद सोच सकते है 

आइये अब बात करते है आपसी सहयोग के बारे में 

आपसी सहयोग को हम आप सभी की मदद से चलाना चाहते है 

आपसी सहयोग के अंदर हम चाहते है की देश के अंदर पलने वाली इन गंभीर समस्यायों का आने वाले 5-10  साल के अंदर खत्म किया जा सके 

और मुमकिन है लेकिन सिर्फ आपसी सहयोग से 

आपसी सहयोग में सबसे पहले संस्था के सदस्यों को मजबूती मिलेगी उसके बाद वही सदस्य देश के अंदर की इन समस्यायों को खत्म करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे 

आपसी सहयोग पहली ऐसी संस्था होगी जो आपसी सहयोग पर चलेगी ना की किसी के डोनेशन या राजनीतिक पार्टी के चंदे पर 

आपसी सहयोग का हर सदस्य आने वाले ५ सालों में सबसे शक्तिशाली सदस्य होंगे जो किसी और संस्था के सदियों से अधिक शक्तिशाली होने 

जिससे हम स्वतः इन समस्यायों का निवारण कर सकेंगे और ये बिलकुल संभव है 

आज समाज में समय की बहुत बड़ी समस्या है किसी से भी सामाजिक कार्य की बात करते है तो उनके पास समय नहीं होता है 

लेकिन हम गारंटी देते है की आपसी सहयोग संस्था के हर सदस्य के पास पूरा समय होगा समाजिक कार्यों के लिए 

आपसी सहयोग देश की पहली ऐसी संस्था होगी जो सामाजिक कार्य के साथ साथ आपको कमाने का मौका भी देगी जिससे आप समाज सेवा के साथ साथ अपनी आजीविका भी कमा सकेंगे 

अगर आप लोगो का सहयोग मिला तो इसी आपसी सहयोग से आपकी ये “आपसी सहयोग ” संस्था आने वाले चंद सालों में देश की सबसे बड़ी संस्था होगी। 

अगर आप भी साथ जुड़ना चाहते है और समाज को नयी दिशा देना चाहते है तो कमेंट बॉक्स में अपने नंबर के साथ सुझाव भेजे
धन्यवाद

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