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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 65 घंटे की अमेरिकी यात्रा करने के बाद भारत लौट आए हैं। भारत वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एयरपोर्ट पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जमकर स्वागत किया। पीएम मोदी के स्वागत में जमकर ढोल नगाड़े बजाए गए। पीएम मोदी ने भी एयरपोर्ट पर पहुंचकर भारत माता की जय का नारा लगाया। प्रधानमंत्री के स्वागत में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी एयरपोर्ट पर पहुंचे हुए थे। उन्होंने भी प्रधानमंत्री का स्वागत किया। पीएम मोदी के एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद वहां मोदी मोदी के नारे लगने शुरू हो चुके थे। जिस समय पीएम मोदी एयरपोर्ट पर से आए तो पीएम को देखने के लिए वहां भारी मात्रा में लोग पहुंचे हुए थे। पीएम मोदी ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़कर लोगों से खुश होकर हाथ मिलाया।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से यात्रा करने के दौरान कई बैठकें भी की, इस दौरान पीएम मोदी खाली नहीं रहे वह 65 घंटे तक अमेरिका में ठहरे, और इस समय में वह 20 बैठकों में शामिल होने के लिए पहुंचे। पीएम मोदी का स्वागत करने पहुंचे जेपी नड्डा ने लोगों को संबोधित करते हुए बोला कि, “पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा यह साबित करती है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया भारत को अलग तरह से देखती है। करोड़ों भारतीयों की ओर से, हम उनका वापस स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ पीएम मोदी की दोस्ती नई नहीं है, उनका पुराना रिश्ता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी यही दोहराया।”

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय यात्रा पूरी करके भारत लौटे हैं। उन्होंने इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ बैठक की थी। जिसमें उन्होंने देश और दुनिया के कई बड़े मुद्दों पर बातें की थी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वे सत्र को भी संबोधित किया था, जिसमें वह कोरोना महामारी पर भी बोलते दिखे।

उन्होंने कहा कि, ”कोरोना महामारी ने दुनिया को सिखाया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को और विविधतापूर्ण बनाया जाए, इसलिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है. हमारा ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ इसी भावना से प्रेरित है. स्वतंत्रता के 75 वर्ष के अवसर पर भारत भारतीय छात्रों द्वारा बनाए गए 75 उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च करने जा रहा है.”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि “पिछले दो सालों से मानवता इस वैश्विक महामारी से जूझ रही है. महामारी से लड़ने के हमारे साझा अनुभव ने हमें सिखाया है कि जब हम साथ होते हैं तो हम मजबूत और बेहतर होते हैं. हमारे प्रयासों में बैंक रहित लोगों को बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना, लाखों लोगों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करना, 50 करोड़ से अधिक भारतीयों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देना शामिल है.”

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र पर भी कहा। उन्होंने कहा कि, ”मैं उस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं, जिसे मदर ऑफ डेमोक्रेसी का गौरव हासिल है। लोकतंत्र की हमारी हजारों वर्षों की महान परंपरा के तहत भारत ने इस 15 अगस्त को आजादी के 75वें साल में प्रवेश किया। हमारा देश ज्वलंत लोकतंत्र का बेहतरीन उदाहरण है। यह भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा, जो कभी रेलवे स्टेशन पर टी-स्टॉल में अपने पिता की मदद करता था, वह आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहा है। मैं सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहा और पिछले सात साल से देश का प्रधानमंत्री हूं। देशवासियों की सेवा करते हुए बीस साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं कि हां, लोकतंत्र काम करके दिखा सकता है और हां, लोकतंत्र ने काम करके दिखाया है।”

प्रधानमंत्री आतंकवाद पर भी बोलते दिखे उन्होंने कहा कि, ”दूसरों के कदम पीछे खींचने वाली सोच रखने वाले जो देश आतंकवाद का सियासी हथकंडों तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि अफगानिस्तान का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो। हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि कोई भी देश वहां की नाजुक स्थितियों का अपने स्वार्थ के लिए गलत इस्तेमाल न करे। वहां के महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है। हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा।”

इसके अलावा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे महान व्यक्तियों, दीनदयाल उपाध्याय, चाणक्य एवं रविंद्र नाथ टैगोर की भी याद दिलाते हुए कहा कि, ”एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आज जयंती है। एकात्म मानव दर्शन यानी यानी स्व से समष्टि तक विकास और विस्तार की सहयात्रा। ये चिंतन अंत्योदय को समर्पित है। इसे आज की परिभाषा में कहा जाता है कि कोई भी पीछे न छूटे। विकास सर्वसमावेशी हो, सर्वस्पर्शी हो, सर्वव्यापी हो, सर्वपोषक हो। यही हमारी प्राथमिकता है।”

”भारत के महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था- कालाति क्रमात काल एव फलम पिबति। यानी जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपने असर को बनाए रखना होगा। जलवायु परिवर्तन, कोरोना, छद्म युद्ध, आतंकवाद और अफगानिस्तान के मुद्दे पर हमने संयुक्त राष्ट्र पर सवाल खड़े होते देखे हैं। दशकों से बनी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।”

”मैं नोबेल सम्मानित गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। शुभो कर्मोपाथे धोरो निर्भयो गान, शब दुर्बल शंशय होक अभोशान। अपने शुभ कर्मपथ पर निर्भिक होकर आगे बढ़ो, सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हों। यह बात आज संयुक्त राष्ट्र और हर जिम्मेदार देश के लिए प्रासंगिक है।”

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